अमन लेखनी समाचार
बख्शी का तालाब। समाजवादी चिंतक एवं प्रखर पहरी बाबू भगवती सिंह आज सुबह में निधन हो गया। वह अपने द्वारा स्थापित बीकेटी के चन्द्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय में कई दिनों से निवास कर रहे थे। 89 वर्षीय समाजवादी संत एवं चंद्र भानु गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक बाबू भगवती सिंह काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। इसके बावजूद वह सामाजिक कार्यों विशेष कर शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में खासे सक्रिय थे। उनके निधन से राजनीति में एक बेहद ईमानदार राजऋषि की जगह रिक्त हो गयी है। बाबू भगवती सिंह समाज के प्रखर पहरी और ईमानदार छवि वाले नेता थे।
चंद्रभान गुप्त स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय बक्शी का तालाब के मीडिया प्रभारी डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि“बाबू जी” के नाम से प्रख्यात भगवती सिंह का पार्थिव शरीर उनके सरकारी आवास रिवर बैंक कालोनी, लखनऊ में जनता के दर्शनार्थ रखा गया पार्थिव शरीर का दर्शन करने पूरे प्रदेश से हजारों की संख्या में लोग आए, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव सहित विभिन्न पार्टियों के बड़े दिग्गज नेताओं ने अंतिम दर्शन किए। रिवर बैंक कॉलोनी से उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। क्योंकि, उन्होंने अपना शरीर केजीएमयू को शोध करने हेतु दान कर दिया था।
बीकेटी के अर्जुनपुर गांव के निवासी समाजवादी नेता बाबू भगवती सिंह ने बड़े संघर्ष के बाद राजनीति की मुख्यधारा में खुद को स्थापित किया था। एक पुलिस के बेटे बाबू जी दो बार विधायक, एमएलसी, पांच बार उप्र प्रदेश सरकार में मंत्री और राज्यसभा सांसद भी रहे।
लगातार सत्ता में रहने के बावजूद वो अपने परिवार के लिए एक अदद भूखंड व मकान नहीं खरीद सके और न कोई उद्योग-धंधा जमा पाए।समाजवादी संत ने बस निःस्वार्थ भाव से गरीब, मजदूर, किसान, दलित, पिछड़े और मुस्लिम के उत्थान में अपन पूरा जीवन लगा दिया।
बाबू भगवती ने डॉ. राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, रामशरण दास और पंडित जनेश्वर मिश्र की संगत में समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाया।
किसान नेता चौधरी चरण सिंह, मोहन सिंह, मुलायम सिंह यादव सहित इस पीढ़ी के साथ समाजवादी आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई बार वो जेल भी गए। बाबू जी जनहित में बहुत जुल्म भी सहे। राम सागर मिश्र के राजनीतिक शिष्य बाबू जी ने एक जमाने में भूखे पेट पदयात्राएं, साइकिल यात्राएं, धरना और प्रदर्शन किए।महोना/बीकेटी विधानसभा के विकास में उनका योगदान अगली पीढ़ी याद रखेगी।
बख्शी का तालाब को तहसील को दर्जा दिलाना, सीबी गुप्त कृषि महाविद्यालय की स्थापना, बीकेटी इंटर कालेज, कुम्हरावा इंटर कालेज और राष्ट्रपति स्मारक इंटर कॉलेज का कायाकल्प करवाना, गोमती नदी पर बसहरी घाट पुल, मंझी घाट पुल, मां चन्द्रिका देवी मंदिर और ऐतिहासिक तालाब ‘बक्सीताल’ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करवाना इत्यादि बाबू जी के खाते में हैं। वह इन दिनों चन्द्रभानु गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय को विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाए हुए थे। हालांकि, उनका स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा था। वर्ष 1984 से आप भारत सेवा संस्थान के संस्थापक सदस्य रहे। वर्ष 2004 से आप भारत सेवा संस्थान के अध्यक्ष के पद पर पदासीन थे।
इतना ही महोना और इटौंजा को टाउन एरिया का दर्जा भी बाबू भगवती सिंह जी ने दिलाया। ग्रामीण इलाके में बिजली, पानी, सड़क और सिंचाई से जुड़े कई अभूतपूर्व कार्य भी भगवती सिंह जी के खाते में ही लिखे हैं। साथ ही, सैरपुर व बेहटा में राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। उनका 89वां जन्मदिन 26 अगस्त, 2021 को हम सब मानते। लेकिन, आज वह गोलकवासी हो गए। इस अवसर पर उनके द्वारा स्थापित सभी संस्थाओं के कर्मचारियों ने अंतिम यात्रा में भाग लिया।
[8:58 PM, 4/4/2021] Kishan Lodhi: पूर्व मंत्री भगवती सिंह







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