ईश्वर न करे कि आप कभी बीमार पड़ें। बीमार भी हुए तो जिला अस्पताल की चौखट पर न पहुंचे। अन्यथा इलाज तो दूर की बात आप की भी कोई गारंटी नहीं कि सुरक्षित अस्पताल से बाहर आ जाएं। क्योंकि जिला अस्पताल को अब दलाल चला रहे हैं। चिकित्सकों के इर्द-गिर्द रक्तबीज की तरह छाए दलालों को पहचानना कठिन है। वहां तो पता ही नहीं चलेगा कि कौन डाक्टर हैं? वह डाक्टर के इर्द-गिर्द उनके सहयोगियों की भूमिका में मिल जाएंगे अथवा मरीज की भूमिका में। जिला चिकित्सालय भले ही मरीजों के उपचार को लेकर फिट न हो, मगर वह असाध्य रोगों के उपचार की क्षमता रखते हैं। गरीबों से भी वह जनरिक दवाओं की मुंहमांगी रकम वसूलते हैं। सब कुछ यूं ही नहीं है। इस बात के पक्के प्रमाण भी हैं। इमरजेन्सी से लेकर जनरल वार्ड तक ओपीडी कक्ष से ऑपरेशन थियेटर तक यदि किसी को सुई की भी आवश्यकता पड़ जाए तो वह यहां आसानी से नहीं मिलेगा। डीएनएस, डी5 या रिंगर लेक्टेड की बोतल नहीं मिल सकेगी, जबकि वहीं मरीजों के बगल में खड़ा प्राइवेट व्यक्ति उसे जिला चिकित्सालय में ही कीमत लेकर सब कुछ उपलब्ध करा देगा। सबसे बड़ी बात यह है कि डॉक्टरों के बिना कहे ही ,इसारो पर ही प्रोटीन,लाइकोपेन सिरप/कैप्सूल आदि दे दिया जाता है,क्योकि प्रोटीन कीमत तो महज 50 रुपये है और दलालो के माध्यम से वही प्रोटीन 350 में दिया जाता है।वहीं जेनरिक लीकोपेन सिरप/कैप्सुल की कीमत महज 15-25 रुपये है, लेकिन दलालो के माध्यम से 250-300 में दिया जाता है। जबकि ये सभी दवाएं जिलाचिकित्सालय में उपलब्ध होना चाहिए, और तो और ,अब और सुनिए इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर वह इंजेक्शन आदि भी लगाते हैं। स्पष्ट है कि जिला चिकित्सालय में यदि एक बाहरी व्यक्ति सूई लगा रहा है, तो प्रशासन क्या कर रहा है?
सुई की तो बात छोड़िए जनाब ऑपरेशन थियेटर में भी डॉक्टरों के इर्द गिर्द नाचते नज़र आते हैं। इन्हें ऑपरेशन थियेटर में जाने से कोई मना नही कर सकता ,कारण जो भी हो आप खुद समझ सकते हैं।सब कुछ ऐसे ही नहीं है।
सवाल तो यह भी खड़ा होता है कि मरीजों के लिए आया इंजेक्शन व डीएनएस जैसी दवाएं आखिर किस पर खर्च हो रही है। प्रशासन कुछ भी कहे, मगर अस्पताल का ही रिकार्ड बताता है कि यहां दलाल हावी हैं। उन्हें लेकर यहां से कई बार पत्र तक लिखा जा चुका है। अस्पताल में ही पुलिस चौकी भी हैं। मगर कार्रवाई आज तक किसी दलाल पर नहीं हुई। दलाल व अस्पताल का कनेक्शन जनता की समझ में भले न आए, मगर जानकार इसे जानते ही हैं। गौरतलब है कि वार्ड में मरीजों को दवा बेंचते समय वह यही कहता है कि देखना यह बात डाक्टर साहब न जानें, जबकि कुछ समय बाद वह उन्हीं के साथ नजर आता है।
वहीं जब इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से बात की गई तब उन्होंने कहा अभी हाल ही में कुछ दलालो को धक्के मार कर भगाया था और पुलिस चौकी में भी जानकारी दी थी। अब इनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।








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