पूजा-अर्चन करते डॉ. असिफ अली जाफरी व पत्नी दीप्ति जाफरी।
जाति और धर्म के मुद्दों से ऊपर उठकर कानपुर शहर के डॉ. आसिफ अली जाफरी लोगों को राष्ट्रीय हित का संदेश देने का काम कर रहे है। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर अपने क्लीनिक के बाहर रविवार को उन्होंने सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। यही नहीं उन्होंने अपनी पत्नी के साथ पूरे विधि विधान को अपनाते हुए पहले भगवान श्री राम और बजरंगबली की पूजा अर्चना की। इसके बाद सुंदरकांड शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित से बड़ा और कोई धर्म नहीं होता। आज मुझे खुशी है कि जिस राम मंदिर आंदोलन के लिए मैंने जेल काटी, आज उसका भव्य स्वरूप देखने को मिल रहा है।
छात्र जीवन से ही संघ का रहा हूं सेवक
मूल रुप से फतेहपुर निवास स्वर्गीय नवाब अली खान के पुत्र डॉ. आसिफ अली जाफरी ने कहा कि मैं बचपन से ही संघ का सेवक रहा हूं। बात 1990 की है जब मेरी उम्र 30 साल की थी। उस समय मैं राम मंदिर आंदोलन के लिए जेल गया था। 1977 में मैंने छात्र राजनीति की शुरुआज की थी। उस दौरान पंडित काली शंकर अवस्थी के संपर्क में मैं आया और संघ में शामिल हो गया। आज तक मैं संघ से जुड़ा हुआ हूं।

30 साल की उम्र में राम मंदिर आंदोलन में गए थे जेल।
1983 में प्रैक्टिस करनी शुरू की डॉ. जाफरी ने बताया कि लखनऊ







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