अमन लेखनी समाचार
लखनऊ के किनारे मलीहाबाद, काकोरी और माल तीन ऐसी तहसील हैं। जिनकी पहचान राज्य में आम की बेल्ट के तौर पर होती है।
उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद में कोविड-19 के खौफ की छाया अभी से आम उत्पादकों पर पड़नी शुरू हो गई है
बागवानो को अंदेशा है कि लगातार दूसरे साल भी पाबंदी कारोबार को प्रभावित कर सकती है पिछले साल आम का व्यापार लॉकडाउन के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ था। पिछले साल लॉकडाउन के चलते आम का निर्यात रुक गया था उसके बाद कारोबार की रही सही कसर कीटनाशकों और मजदूरों की कमी ने पूरी कर दी थी।
इस साल भी करोना के बढ़ते मरीजों किस संख्या से कोविड-19 का खौफ एक बार फिर सिर उठाने लगा है पिछले साल, बागवान आम को लॉकडाउन के चलते अन्य राज्यों तक भेज पाने में नाकाम रहे
दूसरे साल भी पाबंदी व्यापार को कर सकती है प्रभावित
लखनऊ के किनारे मलीहाबाद, काकोरी और माल तीन तहसील हैं. जिनकी पहचान राज्य में आम के बेल्ट के तौर पर होती है. बागवानी विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि जमीन के 23,589 हेक्टेयर पर आम पैदा किया जाता है. कुल आम के उत्पादन में मलीहाबाद का सबसे ज्यादा योगदान माना जाता है यूपी में हर साल आम उगानेवाले खाड़ी देशों को करीब 10 टन दशहरी आम निर्यात करते हैं लेकिन लॉकडाउन के चलते पिछले साल विदेश से कोई भी खरीदार नहीं आया था।
जिसके चलते बाग वानो को मायूस होना पड़ा था।
बागवानी के पेशे से जुड़े रमाशंकर अनुराग कुमार पंकज कुमार हंसराज जवाहरलाल आरिफ आसिफ चंद्रिका आदि बागवानों का कहना है कि करोना का बढ़ता कहर इस साल भी आम की फसल को प्रभावित कर सकता है ।
मलिहाबाद व उसके आसपास कोविड-19 के बढ़ते मरीजों की संख्या से बागवानी पर अभी से कोविड-19 के काले बादल जरूर मंडराने लगे हैं।






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